तिरोड़ा (गोंदिया): तिरोड़ा तहसील के खड़की-डोंगरगांव और आस-पास के क्षेत्रों में पिछले नौ दिनों से दहशत का कारण बना तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के हत्थे चढ़ गया है। 17 जनवरी को बुचाटोला और खड़की के मध्य क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने घेराबंदी कर इस तेंदुए को बेहोश (ट्रैक्युलाइज) कर पकड़ने में बड़ी सफलता हासिल की।
घटना का दुखद पहलू
दहशत का यह सिलसिला 9 जनवरी की सुबह शुरू हुआ था। खड़की-डोंगरगांव निवासी 3 वर्षीय मासूम हियांस रहांगडाले अपने घर के पीछे आंगन में माता-पिता के साथ चूल्हे के पास हाथ सेक रहा था। तभी घात लगाकर बैठे तेंदुए ने अचानक हमला कर उसे उठा लिया, जिससे मासूम की मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद से ही पूरे इलाके में मातम और खौफ का माहौल था।
गांवों में थमी थी जिंदगी
खड़की-डोंगरगांव, नीमगांव, बुचाटोला और रुस्तमपुर जैसे घने जंगलों से घिरे गांवों में तेंदुए का आतंक इस कदर बढ़ गया था कि:
शिक्षा पर असर: बच्चों ने डर के मारे स्कूल जाना बंद कर दिया था।
आर्थिक संकट: मजदूर खेतों में जाने से डर रहे थे, जिससे आजीविका प्रभावित हो रही थी।
अघोषित कर्फ्यू: शाम 6 बजते ही गांवों में सन्नाटा पसर जाता था और लोग घरों में कैद होने को मजबूर थे।
वन विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन
बच्चे की मौत के बाद ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने 9 दिनों तक सघन तलाशी अभियान चलाया। जंगल में गश्त बढ़ाई गई और विभिन्न स्थानों पर पिंजरे लगाए गए। 17 जनवरी को तेंदुए की लोकेशन मिलते ही वन विभाग की टीम ने मुस्तैदी दिखाई और ट्रैक्युलाइजर गन का इस्तेमाल कर उसे बेहोश किया।
वर्तमान स्थिति: पकड़े गए तेंदुए को चिकित्सकीय परीक्षण और सुरक्षा कारणों से नागपुर भेज दिया गया है। तेंदुए के पकड़े जाने के बाद स्थानीय नागरिकों ने राहत की सांस ली है।
Post a Comment