गोंदिया: नगर परिषद चुनाव के परिणाम आए काफी समय बीत चुका है, लेकिन गोंदिया की गलियों में विकास की हलचल कम और सोशल मीडिया पर रील का शोर ज्यादा सुनाई दे रहा है। चुनाव जीतने के बाद अब 'माननीय' पार्षद और उनके समर्थक विकास कार्यों की फाइलें खोलने के बजाय कैमरे के सामने 'एटीट्यूड स्टेटस' और 'विजयी रील' बनाने में मशगूल हैं।
नगर की जनता अब सवाल पूछ रही है कि क्या वोट रील बनाने के लिए दिए गए थे?
सोशल मीडिया पर 'हीरो', जमीन पर सन्नाटा
गोंदिया शहर की कई बुनियादी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। सड़कों की बदहाली, सफाई व्यवस्था में कमी और स्ट्रीट लाइट की समस्याओं से नागरिक जूझ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन उम्मीदवारों ने चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे किए थे, वे अब इंस्टाग्राम और फेसबुक पर अपनी जीत का प्रदर्शन करने में ज्यादा ऊर्जा लगा रहे हैं।
जनता की मुख्य शिकायतें:
- अधूरे वादे: चुनाव के दौरान किए गए विकास के दावों पर अब कोई चर्चा नहीं हो रही है।
- दिखावा ज्यादा, काम कम: जनता का कहना है कि पार्षदों को वार्ड की समस्याओं के लिए समय नहीं मिल रहा, लेकिन रील बनाने के लिए पूरा दिन कम पड़ रहा है।
- बदहाल वार्ड: कई वार्डों में कचरे के अंबार लगे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि केवल अपनी 'लोकप्रियता' बढ़ाने में व्यस्त हैं।
वक्त है काम करने का...
नगर परिषद का काम शहर की व्यवस्था को सुचारू बनाना है, न कि सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाना। गोंदिया की जनता को रील की चमक नहीं, बल्कि पक्की सड़कें और स्वच्छ पेयजल चाहिए। चुनाव खत्म हो चुका है, अब बारी "रील कॉम्पिटिशन" से बाहर निकलकर असल विकास करने की है।
"जनता ने आपको जिम्मेदारी सौंपी है, मनोरंजन का ठेका नहीं। नगर परिषद के नवनिर्वाचित प्रतिनिधि जितनी जल्दी यह समझेंगे, गोंदिया का भविष्य उतना ही बेहतर होगा।"
Post a Comment